रात का खाना खाने के बाद अचानक सीने में दर्द, भारीपन, चुभन या जलन महसूस हो और मन में पहला खयाल आए कि कहीं यह दिल की बीमारी तो नहीं हो गई। ऐसे समय पर सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि सही चेस्ट पेन का इलाज क्या है और तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए।
सीने में दर्द कई बार सिर्फ गैस या एसिडिटी की वजह से होता है, पर कभी यह हार्ट अटैक, फेफड़ों की बीमारी या किसी गंभीर समस्या का संकेत भी बन सकता है। फर्क समझना आसान नहीं होता, इसलिए थोड़ी सी लापरवाही भी जान पर भारी पड़ सकती है। इसीलिए सीने में दर्द की सही पहचान और समय पर सही इलाज बहुत जरूरी है।
रांची और आसपास के हजारों परिवारों ने पिछले तीन दशकों से Raj Hospitals पर भरोसा किया है। यहां कार्डियक साइंसेज, इमरजेंसी मेडिसिन, पल्मोनोलॉजी, इंटरनल मेडिसिन और क्रिटिकल केयर की टीम चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती है, ताकि सीने के किसी भी तरह के दर्द का कारण जल्दी पता चल सके और सही उपचार शुरू हो सके। आधुनिक कार्डियक कैथ लैब, उन्नत आईसीयू, छत पर हेलिपैड और एक ही छत के नीचे सभी जांच सुविधाएं यहां चेस्ट पेन का इलाज को तेज और सुरक्षित बनाती हैं।
इस लेख में आप जानेंगे:
- सीने में दर्द कैसा महसूस होता है और उसके किस-किस प्रकार के अहसास हो सकते हैं
- सीने में दर्द के सामान्य कारण – गैस, दिल, फेफड़े, नसें और मांसपेशियां
- गैस वाले दर्द और दिल से जुड़े दर्द में फर्क कैसे करें
- कौन से लक्षण आपातकाल माने जाते हैं और कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए
- डॉक्टर कौन-कौन सी जांच करते हैं और अस्पताल में मिलने वाले मेडिकल इलाज क्या हैं
- हल्की समस्या में सहायक घरेलू उपाय और ज़रूरी जीवनशैली में बदलाव
अंत तक पढ़ने पर यह फैसला करना आसान होगा कि किस स्थिति में घर पर आराम काफी है और कब तुरंत Raj Hospitals पहुंचना जरूरी है।
“अगर सीने में दर्द के कारण को लेकर ज़रा भी शक हो, तो देरी करना खुद से जोखिम लेना है।” – सामान्य कार्डियोलॉजी सलाह
सीने में दर्द को समझना: यह कैसा महसूस होता है?

सीने में दर्द हर व्यक्ति में अलग तरह से महसूस हो सकता है, इसलिए सिर्फ दूसरों के अनुभव से तुलना करके इसे समझना सही नहीं होता। कोई इसे दबाव की तरह महसूस करता है, तो किसी को तेज चुभन या जलन लगती है। कुछ लोगों में दर्द हल्का रहता है, पर देर तक बना रहता है और बेचैनी पैदा करता है।
कई बार दर्द ऐसा लगता है जैसे:
- किसी ने छाती पर भारी वजन रख दिया हो
- छाती कस गई हो या निचोड़ी जा रही हो
- सुई जैसी चुभन हो, जो कुछ सेकंड के लिए आए और फिर चली जाए
एसिडिटी या GERD (जीईआरडी) होने पर पेट से ऊपर की तरफ उठती जलन छाती और गले तक महसूस हो सकती है, जिसे लोग अक्सर हार्टबर्न कहते हैं। गैस के कारण पेट फूलना, पेट में भारीपन और छाती के ऊपरी हिस्से में भरा-भरा लगना भी आम है।
सीने का दर्द सिर्फ छाती तक सीमित नहीं रहता। दिल या नसों से जुड़ी परेशानी में यह दर्द बाएं कंधे और बांह तक जा सकता है, कभी गर्दन, जबड़े या पीठ के बीच वाले हिस्से में भी खिंचाव जैसा महसूस हो सकता है। कुछ लोगों में ऊपरी पेट में जलन या दबाव का अहसास होता है, जो अपच जैसा लगता है लेकिन असल में यह दिल से जुड़ी समस्या भी हो सकती है।
कई बार दर्द के साथ सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर आना, मतली, बार-बार डकार या बहुत ज्यादा घबराहट भी महसूस हो सकती है। इसलिए अगर दर्द अचानक हो, तेज हो या इन लक्षणों के साथ हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए, खासकर जब सही चेस्ट पेन का इलाज करवाना हो।
Chest Pain Ho Raha Hai? Turant Samjhein Kya Hai Wajah
Seene me dard, jalan, bhari pan, chubhan, ya dard ka left arm, jaw ya peeth tak failna gas, acidity ya heart emergency ka sign ho sakta hai. Sahi time par sahi diagnosis bahut zaroori hota hai. Raj Hospital Ranchi me chest pain ka ilaj advanced tests aur expert doctors ke saath kiya jata hai.
Chest Pain Specialist Se Turant Salah Leinसीने में दर्द के सामान्य कारण

सीने में दर्द हमेशा दिल की बीमारी का मतलब नहीं होता, लेकिन यह मान लेना कि यह सिर्फ गैस है, भी खतरनाक हो सकता है। अलग-अलग कारणों को समझने से यह तय करना थोड़ा आसान हो जाता है कि किस स्थिति में तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है और कब सामान्य जांच से काम चल सकता है।
“हर सीने का दर्द हार्ट अटैक नहीं होता, लेकिन लगभग हर हार्ट अटैक किसी न किसी तरह के सीने के दर्द से ही शुरू होता है।” – कार्डियोलॉजी में प्रचलित कहावत
गैस और पाचन संबंधी समस्याएं
सबसे ज्यादा देखा जाने वाला कारण गैस, एसिडिटी और अपच होता है। जब पेट या आंतों में गैस फंस जाती है, तो वह डायाफ्राम पर दबाव डालती है और यह दबाव छाती के दर्द की तरह महसूस होता है।
कुछ आम कारण:
- ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या देर रात भारी खाना
- बहुत जल्दी-जल्दी खाना या बहुत बड़े हिस्से में खाना
- बहुत ज्यादा चाय, कॉफी और कार्बोनेटेड ड्रिंक
- लंबे समय तक कब्ज रहना
इन स्थितियों में सीने में जलन, खट्टे डकार और भारीपन जैसे लक्षण अक्सर साथ होते हैं।
गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स बीमारी (जीईआरडी) में पेट का एसिड बार-बार ऊपर अन्नप्रणाली में आता है, जिससे लगातार जलन और दर्द रह सकता है। अल्सर, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम और अन्य पेट की बीमारियां भी सीने के बीच या ऊपरी पेट में ऐसा दर्द पैदा कर सकती हैं, जो कई बार दिल के दर्द जैसा लगता है।
हृदय संबंधी कारण (सबसे गंभीर)
दिल से जुड़ी परेशानी सीने के दर्द का सबसे गंभीर कारण मानी जाती है।
- एनजाइना (Angina) तब होता है जब दिल की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन वाला खून नहीं मिल पाता। यह आम तौर पर चलने, सीढ़ियां चढ़ने या तनाव के समय छाती में दबाव या जकड़न की शक्ल में आता है और आराम करने पर कम हो जाता है।
- दिल का दौरा (हार्ट अटैक) तब होता है जब किसी कोरोनरी धमनी में खून का थक्का बनकर खून का बहाव लगभग रुक जाता है। इस स्थिति में सीने के बीच या बाईं तरफ तेज दबाव या निचोड़ने जैसा दर्द होता है, जो अक्सर बाएं हाथ, जबड़े या पीठ तक जाता है और आराम से भी नहीं घटता। कई बार 15–20 मिनट से ज्यादा समय तक बना रह सकता है।
Raj Hospitals के कार्डियक साइंसेज विभाग में ऐसे मरीजों के लिए त्वरित ईसीजी, खून की जांच, थक्का घोलने वाली दवाओं और एंजियोप्लास्टी जैसी उन्नत सेवाओं के साथ चौबीसों घंटे टीम तैयार रहती है।
मांसपेशियों और हड्डियों से संबंधित कारण
कभी-कभी कारण सिर्फ छाती की मांसपेशियों में खिंचाव या चोट भी हो सकता है।
ऐसी स्थितियां जहां यह दर्द बढ़ सकता है:
- भारी सामान उठाना
- अचानक जोरदार व्यायाम शुरू करना
- लगातार या तेज खांसी आना
- गलत तरीके से सोना या लंबे समय तक एक ही पोजिशन में बैठना
इस तरह का दर्द खासकर शरीर मोड़ने, गहरी सांस लेने या किसी विशेष दिशा में हाथ हिलाने पर बढ़ता है।
कंधे या बांह के टेंडन में सूजन यानी टेंडिनाइटिस या पसलियों में हल्का फ्रैक्चर भी छूने पर या हिलने पर सीने में तेज चुभन जैसा दर्द दे सकता है। ऐसे मामलों में चेस्ट पेन का इलाज मुख्य रूप से आराम, दवा और फिजियोथेरेपी पर आधारित होता है।
अन्य महत्वपूर्ण कारण
घबराहट, पैनिक अटैक और ज्यादा चिंता भी सीने में दबाव या दर्द का कारण बन सकते हैं। तेज-तेज सांस लेना, दिल की धड़कन का बढ़ना और मांसपेशियों का तनाव मिलकर ऐसी स्थिति बना देते हैं जिसे कई लोग हार्ट अटैक समझ बैठते हैं।
कुछ मामलों में नसों पर दबाव, जैसे सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस या पेरिफेरल न्यूरोपैथी, दर्द को बांह और छाती तक फैला सकते हैं। निमोनिया, फेफड़ों में पानी, पल्मोनरी एम्बोलिज्म या फेफड़े के फटने जैसी फेफड़ों की बीमारियां भी तेज सीने के दर्द के साथ सांस फूलना पैदा कर सकती हैं। धूम्रपान, शराब, लगातार तनाव और अनियमित जीवनशैली इन सभी जोखिमों को बढ़ा देती हैं।
कुछ लोगों में हरपीज जोस्टर (नागिन) के दाने आने से पहले या बाद में भी नसों के रास्ते तेज जलन वाला सीने का दर्द हो सकता है।
Raj Hospitals में कार्डियोलॉजी के साथ-साथ पल्मोनोलॉजी, इंटरनल मेडिसिन और फिजियोथेरेपी विभाग मिलकर ऐसे हर कारण की जांच और इलाज एक ही जगह पर करते हैं, जिससे मरीज को इधर-उधर भटकना न पड़े।
गैस के दर्द और हृदय के दर्द में अंतर कैसे करें?
गैस की वजह से होने वाला सीने का दर्द और दिल की बीमारी से होने वाला दर्द कई बार बहुत मिलते-जुलते लगते हैं। फिर भी कुछ खास फर्क ऐसे हैं जो अंदाजा लगाने में मदद कर सकते हैं कि मामला कितना गंभीर हो सकता है। ध्यान रहे कि यह जानकारी केवल मार्गदर्शन के लिए है, पक्का फैसला हमेशा डॉक्टर ही करते हैं।
| विशेषता | गैस का दर्द | हृदय का दर्द |
|---|---|---|
| दर्द का स्थान | अक्सर ऊपरी पेट या छाती के बीच होता है, कई बार पसलियों या बीच की हड्डी के आसपास महसूस होता है। यह एक जगह भी रह सकता है और फैला हुआ भी लग सकता है। | ज्यादातर छाती के बीच या थोड़ा बाईं तरफ होता है। यह दर्द गर्दन, जबड़े, कंधों, पीठ या खासकर बाईं बांह तक जा सकता है। |
| दर्द की प्रकृति | हल्का, चुभन भरा या ऐंठन जैसा हो सकता है। अक्सर आता-जाता रहता है और खाने या पेट की स्थिति से जुड़ा होता है। | दबाव, जकड़न, भारीपन या निचोड़ने जैसा महसूस होता है। दर्द लगातार बना रह सकता है और समय के साथ बढ़ भी सकता है। |
| संबंधित लक्षण | पेट फूलना, खट्टी डकार, पेट में गुड़गुड़ाहट, गैस पास होना और खाने के बाद ज्यादा भारीपन जैसे लक्षण साथ हो सकते हैं। | सांस फूलना, ठंडा पसीना, मतली, उल्टी, बहुत ज्यादा घबराहट या चक्कर आना जैसे लक्षण आम हैं। |
| दर्द को बढ़ाने वाले कारण | गैस बनाने वाले खाने, जल्दी-जल्दी खाने, ज्यादा लेटने या झुकने पर दर्द बढ़ सकता है। | शारीरिक मेहनत, सीढ़ी चढ़ना, भारी सामान उठाना या भावनात्मक तनाव से दर्द शुरू या तेज हो सकता है। |
| दर्द में राहत | डकार आने, गैस पास होने, एंटासिड लेने या शरीर की स्थिति बदलने से आराम मिल सकता है। | एनजाइना में आराम करने से कुछ राहत मिल सकती है, पर दिल के दौरे में आम तौर पर कोई भी साधारण उपाय काम नहीं करता। |
कभी-कभी हार्ट अटैक भी गैस या अपच जैसा लग सकता है, खासकर बुजुर्गों और महिलाओं में। इसलिए अगर दर्द नया हो, अलग महसूस हो, या ऊपर दिए गए गंभीर लक्षणों के साथ हो, तो इसे सिर्फ गैस मानकर इंतजार करना खतरनाक हो सकता है।
“When in doubt, check it out.” – इमरजेंसी मेडिसिन में प्रचलित सलाह
ऐसी स्थिति में सबसे समझदारी भरा कदम यही है कि तुरंत नजदीकी अस्पताल जाएं। Raj Hospitals का इमरजेंसी मेडिसिन विभाग चौबीसों घंटे सीने के दर्द वाले मरीजों की प्राथमिक जांच के लिए तैयार होता है, ताकि यह जल्दी तय किया जा सके कि यह सामान्य गैस है या दिल से जुड़ा आपातकाल, और उसी के अनुसार सही चेस्ट पेन का इलाज शुरू किया जा सके।
डॉक्टर से कब संपर्क करें: आपातकालीन लक्षण
सीने में हल्का दर्द या जलन कभी-कभी सामान्य हो सकती है, पर कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना जान जोखिम में डाल सकता है। इन संकेतों को समझना हर परिवार के लिए जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सही कदम उठाया जा सके।
नीचे दिए गए लक्षणों में से अगर कोई भी दिखे, तो देरी नहीं करनी चाहिए:
- अचानक तेज दर्द जो निचोड़ने या भारीपन जैसा लगे और कुछ मिनटों में बढ़ता चला जाए
- दर्द जो छाती के बीच या बाईं तरफ शुरू होकर बाएं हाथ, दोनों कंधों, गर्दन, जबड़े या पीठ के ऊपरी हिस्से तक जाए
- बिना मेहनत के भी सांस फूलना, सीढ़ियां चढ़ने पर जल्दी थक जाना या सीने में जकड़न
- अचानक ठंडा पसीना, सिर हल्का पड़ना, चक्कर आना या बेहोशी जैसा अहसास
- सीने के दर्द के साथ जी मिचलाना, उल्टी, बहुत ज्यादा कमजोरी या समझ से बाहर घबराहट
- ऐसा दर्द जो हर बार चलने या मेहनत करने पर बढ़ जाए और आराम करने पर थोड़ा कम हो, पर बार-बार लौट आए (संभावित एनजाइना)
- किसी दुर्घटना, जोरदार चोट या गिरने के बाद छाती, कंधे या बांह में दर्द, जो सांस लेने या हिलने पर बढ़ता जाए
कई मरीज बताते हैं कि उन्हें ऐसा लगा जैसे किसी ने छाती को जोर से कस दिया हो और सांस ठीक से नहीं आ रही हो। ऐसे में घर पर तेल मलने या भाप लेने जैसे उपायों में समय गंवाना ठीक नहीं होता।
“टाइम इज़ मसल – दिल का जितना हिस्सा जल्दी बचा लिया जाए, आगे की जीवन-गुणवत्ता उतनी ही बेहतर रहती है।” – सामान्य कार्डियोलॉजी सिद्धांत
ऐसे सभी मामलों में एम्बुलेंस बुलाना बेहतर है, खुद ड्राइव करना जोखिम भरा हो सकता है। Raj Hospitals रांची के केंद्र में स्थित है, जहां चौबीसों घंटे इमरजेंसी, क्रिटिकल केयर और कार्डियोलॉजी टीम, उन्नत आईसीयू और कार्डियक कैथ लैब के साथ मौजूद रहती है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत जीवनरक्षक चेस्ट पेन का इलाज शुरू किया जा सके।
सीने में दर्द का निदान: डॉक्टर क्या जांच करते हैं?

जब कोई मरीज सीने में दर्द लेकर डॉक्टर के पास आता है, तो सबसे पहले कोशिश यह रहती है कि यह पता चल जाए कि दर्द दिल से जुड़ा है या किसी और वजह से। इसके लिए क्रमबद्ध तरीके से सवाल, जांच और टेस्ट किए जाते हैं।
प्रारंभिक मूल्यांकन
शुरुआत में डॉक्टर आपसे दर्द के बारे में विस्तार से पूछते हैं:
- दर्द कब शुरू हुआ और कितनी देर रहता है
- दर्द कैसा महसूस होता है – दबाव, चुभन, जलन या जकड़न
- दर्द कहां-कहां फैलता है और किन स्थितियों में बढ़ता या घटता है
- इसके साथ सांस फूलना, पसीना, उल्टी, डकार या घबराहट जैसे कौन-कौन से लक्षण हैं
साथ ही आपकी:
- खाने-पीने की आदतें
- धूम्रपान, शराब का सेवन
- ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल
- पुरानी दिल की बीमारी या फैमिली हिस्ट्री
जैसी बातों को भी ध्यान से नोट किया जाता है।
इसके बाद शारीरिक परीक्षण में ब्लड प्रेशर, नाड़ी, ऑक्सीजन स्तर, बुखार, छाती और पेट की जांच की जाती है। स्टेथोस्कोप से दिल और फेफड़ों की आवाजें सुनी जाती हैं, ताकि किसी असामान्य धड़कन, फेफड़ों में घरघराहट या पानी जैसे संकेतों का पता चल सके।
हृदय संबंधी जांच
दिल से जुड़ी आशंका होने पर सबसे पहले ईसीजी (Electrocardiogram) कराया जाता है, जिससे दिल की धड़कन और विद्युत गतिविधि में होने वाले बदलाव तुरंत दिख जाते हैं। दिल के दौरे या गंभीर अतालता में यह जांच बहुत मददगार साबित होती है।
साथ ही खून की जांच में ट्रोपोनिन जैसे कार्डियक एंजाइम देखे जाते हैं, जो दिल की मांसपेशी को नुकसान होने पर बढ़ जाते हैं। कई बार सीरियल ईसीजी और दोहराई गई ब्लड टेस्ट रिपोर्टों से स्थिति और साफ होती है।
Raj Hospitals में अत्याधुनिक ईसीजी मशीनें और त्वरित रिपोर्टिंग की सुविधा मौजूद है, जिससे सीने के दर्द वाले मरीजों का मूल्यांकन जल्दी हो जाता है और सही चेस्ट पेन का इलाज शुरू करने में देरी नहीं होती।
इमेजिंग अध्ययन
- चेस्ट एक्स-रे से फेफड़ों, दिल के आकार और मुख्य रक्त वाहिकाओं की स्थिति की जानकारी मिलती है। इससे निमोनिया, फेफड़े में पानी भरना या फेफड़े के सिकुड़ने जैसी समस्याएं पकड़ी जा सकती हैं।
- जरूरत पड़ने पर सीटी स्कैन से महाधमनी, फेफड़ों और छाती के अंदरूनी ढांचे की और ज्यादा साफ तस्वीर मिलती है।
- कुछ जटिल मामलों में एमआरआई या इकोकार्डियोग्राफी की मदद से दिल की मांसपेशियों, वाल्व और पंप करने की क्षमता को बारीकी से देखा जाता है।
Raj Hospitals में ये सभी उन्नत इमेजिंग सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध हैं।
पाचन संबंधी जांच
अगर लक्षणों से लगता है कि दर्द एसिडिटी, जीईआरडी या पेट की किसी और बीमारी से जुड़ा हो सकता है, तो:
- ऊपरी एंडोस्कोपी की मदद से अन्नप्रणाली और पेट के अंदर सीधा देखा जाता है। इससे अल्सर, सूजन या हर्निया जैसी स्थितियों की पहचान हो जाती है।
- कभी-कभी एसोफैगल पीएच मॉनिटरिंग से अन्नप्रणाली में एसिड की मात्रा मापी जाती है, जिससे बार-बार होने वाले रिफ्लक्स की पुष्टि होती है।
अन्य परीक्षण
जब शक नसों या मांसपेशियों पर हो, तो नर्व कंडक्शन स्टडी या इलेक्ट्रोमायोग्राफी (EMG) जैसे टेस्ट किए जा सकते हैं। यह जांचें बताती हैं कि कहीं नसों पर दबाव या नुकसान तो नहीं है, जो दर्द को छाती या बांह तक फैला रहा हो।
Raj Hospitals की खासियत यह है कि अधिकतर जरूरी जांचें एक ही बिल्डिंग में हो जाती हैं, जिससे मरीज को अलग-अलग सेंटर जाने की परेशानी नहीं होती और निदान तेज व सटीक बनता है।
“अच्छा निदान आधा इलाज है – सही कारण पहचान लिए जाएं, तो इलाज सीधा और सुरक्षित हो जाता है।”
Chest Pain Ho Raha Hai? Turant Samjhein Kya Hai Wajah
Seene me dard, jalan, bhari pan, chubhan, ya dard ka left arm, jaw ya peeth tak failna gas, acidity ya heart emergency ka sign ho sakta hai. Sahi time par sahi diagnosis bahut zaroori hota hai. Raj Hospital Ranchi me chest pain ka ilaj advanced tests aur expert doctors ke saath kiya jata hai.
Chest Pain Specialist Se Turant Salah Leinसीने में दर्द का मेडिकल उपचार
सीने में दर्द का सही इलाज तभी संभव है जब असली कारण स्पष्ट हो जाए। इसी लिए जांच के बाद डॉक्टर हर मरीज के लिए अलग उपचार योजना बनाते हैं, ताकि न केवल दर्द कम हो, बल्कि आगे की जटिलताओं से भी बचा जा सके।
गैस और एसिडिटी के लिए उपचार
अगर जांच में पता चलता है कि सीने में दर्द गैस, एसिडिटी या जीईआरडी की वजह से है, तो पहला लक्ष्य पेट के एसिड को नियंत्रित करना और पाचन को आराम देना होता है।
आमतौर पर उपयोग में आने वाले उपाय:
- एंटासिड – पेट के अतिरिक्त एसिड को तुरंत निष्क्रिय करके जलन और दर्द से थोड़ी देर में राहत दिलाती हैं।
- गैस बहुत ज्यादा हो तो सिमेथिकोन जैसी दवाएं गैस के बुलबुले तोड़कर सूजन और दबाव घटाती हैं।
- लंबे समय से चल रही एसिडिटी में प्रोटॉन पंप इनहिबिटर (PPI) जैसे ओमेप्राजोल या पैंटोप्राजोल दी जाती हैं, जो पेट में एसिड बनने की मात्रा को कम करती हैं।
- कुछ मरीजों को H2 ब्लॉकर दवाएं भी दी जा सकती हैं।
साथ में डॉक्टर आहार और जीवनशैली सुधारने की सलाह देते हैं, ताकि चेस्ट पेन का इलाज सिर्फ दवाओं पर निर्भर न रहे।
हृदय संबंधी समस्याओं के लिए उपचार
दिल से जुड़े सीने के दर्द में हर मिनट अहम होता है।
- एनजाइना वाले मरीजों को अक्सर नाइट्रोग्लिसरीन दी जाती है, जो रक्त वाहिकाएं फैलाकर दिल में खून की आपूर्ति बढ़ाती है और दर्द कम करती है।
- हार्ट अटैक की आशंका में एस्पिरिन और दूसरी खून पतला करने वाली दवाएं दी जाती हैं, ताकि थक्के बड़े न हों।
- कुछ स्थितियों में विशेष थक्का घोलने वाली दवाएं (थ्रोम्बोलाइटिक थेरेपी) दी जाती हैं, जो बंद धमनी में बने थक्के को तोड़ती हैं।
- कई मरीजों को बीटा ब्लॉकर, ACE इनहिबिटर और कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं दी जाती हैं, ताकि दिल पर भार कम हो और आगे दिल के दौरे का खतरा घटे।
अगर किसी कोरोनरी धमनी में गंभीर रुकावट मिले, तो:
- एंजियोप्लास्टी करके गुब्बारे की मदद से धमनी को खोला जाता है और स्टेंट डाला जाता है।
- और जटिल मामलों में कोरोनरी बाईपास सर्जरी (CABG) की जरूरत पड़ सकती है, जिसमें नई नस की सहायता से खून के बहाव का नया रास्ता बनाया जाता है।
Raj Hospitals के कार्डियक साइंसेज विभाग में अत्याधुनिक कार्डियक कैथ लैब, अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट और कार्डियक सर्जन की टीम है, जो ऐसे सभी उन्नत उपचार किफायती लागत पर उपलब्ध कराती है। यहां क्रिटिकल केयर यूनिट और इमरजेंसी टीम मिलकर दिल से जुड़े चेस्ट पेन का इलाज सुरक्षित तरीके से करती हैं।
मांसपेशियों और हड्डियों से संबंधित दर्द के लिए उपचार
अगर सीने में दर्द मांसपेशियों के खिंचाव, पसलियों की हल्की चोट या टेंडिनाइटिस की वजह से हो, तो मुख्य इलाज:
- आराम
- उचित दर्द निवारक दवाएं
- ठंडी या गर्म सिंकाई
होता है। नॉन स्टेरॉयडल एंटी इंफ्लेमेटरी दवाओं से सूजन और दर्द कम हो सकता है।
फ्रैक्चर या बड़ी चोट में स्प्लिंट या कास्ट लगाकर हड्डी को स्थिर किया जाता है। बाद के चरण में फिजियोथेरेपी से मांसपेशियों की ताकत और लचीलापन लौटाने में मदद मिलती है। Raj Hospitals का फिजियोथेरेपी विभाग ऐसे मरीजों के लिए व्यक्तिगत व्यायाम कार्यक्रम बनाकर सामान्य जीवन की ओर वापसी में साथ देता है।
सीने में दर्द के लिए घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव

हल्की गैस, एसिडिटी या मांसपेशियों के मामूली खिंचाव से होने वाले सीने के दर्द में कुछ साधारण घरेलू उपचार काफी राहत दे सकते हैं। हालांकि यह समझना जरूरी है कि ये नुस्खे केवल हल्के मामलों में मददगार होते हैं, दिल या फेफड़ों की गंभीर बीमारी में इन पर भरोसा करना सही नहीं है।
तत्काल राहत के लिए घरेलू उपचार
यदि जांच के बाद डॉक्टर ने साफ कर दिया है कि समस्या सिर्फ गैस या एसिडिटी की है, तो कुछ घरेलू चीजें काफी आराम दे सकती हैं:
- ठंडा दूध या सादा छाछ – पेट के एसिड को कुछ देर के लिए शांत करके सीने की जलन कम कर सकते हैं।
- भोजन के बाद सौंफ या अजवाइन थोड़ी देर चबाना – गैस निकलने में मदद मिलती है और पेट का भारीपन घटता है।
- अदरक के छोटे टुकड़े को धीरे-धीरे चबाना या हल्की अदरक की चाय – पाचन को सुधार सकती है और गैस बनने की प्रवृत्ति कम कर सकती है।
- पुदीने की पत्तियों की चाय – पाचन तंत्र की मांसपेशियों को ढीला करके ऐंठन कम करने में मदद कर सकती है।
- केला और पपीता – प्राकृतिक एंटासिड और पाचन एंजाइम से भरपूर होते हैं, जो पेट को शांत रखते हैं और बार-बार एसिडिटी होने की संभावना घटाते हैं।
- छाती पर हल्की गर्म सिंकाई – मांसपेशियों के खिंचाव से होने वाले दर्द को कम कर सकती है।
- सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले गुनगुना पानी – पाचन सुधारने और कब्ज कम करने में सहायक है, जिससे गैस वाले चेस्ट पेन का इलाज में भी मदद मिलती है।
“सीने के दर्द में घरेलू नुस्खे तभी उपयोगी हैं, जब डॉक्टर ने गंभीर कारणों को पहले ही नकार दिया हो।”
जीवनशैली में महत्वपूर्ण बदलाव
केवल दवा या घरेलू नुस्खे काफी नहीं होते, लंबे समय तक राहत के लिए रोजमर्रा की आदतों में बदलाव जरूरी है।
कुछ ज़रूरी सुझाव:
- दिन में तीन बड़े भोजन की जगह चार या पांच छोटे भोजन करें, ताकि पेट पर अचानक ज्यादा दबाव न पड़े।
- आराम से बैठकर भोजन करें, हर कौर को अच्छी तरह चबाएं और बहुत जल्दी-जल्दी न खाएं।
- रात का खाना सोने से कम से कम दो से तीन घंटे पहले कर लें, ताकि लेटते समय पेट बहुत ज्यादा भरा न हो।
- खाने के तुरंत बाद लेटने या झुकने से बचें।
- मसालेदार, तैलीय, बहुत खट्टे और जंक फूड, चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक का सेवन सीमित रखें, इससे एसिडिटी कम हो सकती है।
- दिन भर में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पर्याप्त पानी पीएं, पर खाने के साथ बहुत ज्यादा पानी एकदम से न लें।
- वजन नियंत्रित रखें, धूम्रपान और शराब छोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाएं।
- ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें, खासकर पेट और छाती के आसपास बहुत कसे कपड़ों से बचें।
- रोज थोड़ा बहुत चलना, हल्का व्यायाम और सरल योगासन अपनाएं।
- सोते समय बिस्तर के सिर वाली तरफ को थोड़ा ऊंचा रखें, इससे रात में एसिड रिफ्लक्स की समस्या घट सकती है।
- तनाव कम करने के लिए साधारण योग, प्राणायाम या ध्यान जैसी तकनीकें अपनाएं।
ध्यान देने की बात यह है कि अगर इन सब बदलावों के बाद भी सीने में दर्द बार-बार हो या बढ़ता जाए, तो अपने आप दवा बढ़ाने की बजाय डॉक्टर से मिलना जरूरी है। Raj Hospitals में ऐसी स्थितियों के लिए विस्तृत जांच और सुरक्षित चेस्ट पेन का इलाज की सुविधाएं हर समय उपलब्ध हैं।
Conclusion
सीने में दर्द कोई एक जैसी समस्या नहीं है। यह कभी सिर्फ गैस और एसिडिटी से जुड़ा हल्का दर्द हो सकता है, तो कभी हार्ट अटैक, फेफड़ों की बीमारी या नसों की समस्या जैसी गंभीर स्थिति का संकेत भी दे सकता है। दर्द कैसा है, कहां हो रहा है, कितना समय रहता है और उसके साथ कौन-कौन से अन्य लक्षण दिख रहे हैं, यह सब बातें मिलकर सही तस्वीर बनाती हैं।
गैस वाले दर्द और दिल से जुड़े दर्द के बीच के सामान्य फर्क जानना मददगार है, पर सिर्फ अंदाज के भरोसे बैठना ठीक नहीं है। हल्के और पुराने अनुभव वाले दर्द में घरेलू उपाय, भोजन और जीवनशैली में सुधार अक्सर काफी राहत देते हैं, लेकिन अचानक शुरू हुए तेज दर्द, सांस फूलना, पसीना, चक्कर या दर्द के फैलने जैसे संकेतों को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। समय पर अस्पताल पहुंचना ही सुरक्षित चेस्ट पेन का इलाज है।
रांची और आसपास के मरीजों के लिए Raj Hospitals बीस से ज्यादा सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं, उन्नत कार्डियक साइंसेज, इमरजेंसी मेडिसिन, पल्मोनोलॉजी और क्रिटिकल केयर के साथ भरोसेमंद विकल्प है। यहां चौबीसों घंटे इमरजेंसी, आधुनिक डायग्नोस्टिक टेस्ट, कार्डियक कैथ लैब, आईसीयू और समर्पित डॉक्टरों व नर्सों की टीम मौजूद रहती है, ताकि हर वर्ग के मरीज को किफायती और उच्चस्तरीय देखभाल मिल सके।
सीने में किसी भी तरह का नया या अलग महसूस होने वाला दर्द हो, तो देर न करें। जरूरत पड़ने पर तुरंत Raj Hospitals से संपर्क करें और अपने तथा अपने प्रियजनों के स्वास्थ्य को पहली प्राथमिकता दें।
Chest Pain Ho Raha Hai? Turant Samjhein Kya Hai Wajah
Seene me dard, jalan, bhari pan, chubhan, ya dard ka left arm, jaw ya peeth tak failna gas, acidity ya heart emergency ka sign ho sakta hai. Sahi time par sahi diagnosis bahut zaroori hota hai. Raj Hospital Ranchi me chest pain ka ilaj advanced tests aur expert doctors ke saath kiya jata hai.
Chest Pain Specialist Se Turant Salah Leinसीने में दर्द का इलाज क्या होता है?
सीने में दर्द का इलाज उसके वास्तविक कारण पर निर्भर करता है। यदि दर्द गैस, एसिडिटी या अपच के कारण है तो दवाओं और खान-पान में बदलाव से आराम मिल सकता है। लेकिन अगर दर्द दिल से जुड़ा हो, तो ईसीजी, खून की जांच और तुरंत मेडिकल उपचार की आवश्यकता होती है।
गैस के दर्द और दिल के दर्द में कैसे अंतर करें?
गैस का दर्द आमतौर पर खाने के बाद, जलन या पेट भरे होने के साथ होता है और डकार आने से कुछ राहत मिल जाती है। दिल का दर्द अक्सर दबाव या भारीपन जैसा होता है, जो बाएं हाथ, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैल सकता है और आराम करने से भी कम नहीं होता।
सीने में दर्द होने पर तुरंत क्या करना चाहिए?
यदि सीने में दर्द अचानक तेज हो, दबाव जैसा लगे, या उसके साथ सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर या उल्टी आए, तो तुरंत नजदीकी अस्पताल या इमरजेंसी में जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में घर पर इंतजार करना खतरनाक हो सकता है।
क्या हर सीने का दर्द हार्ट अटैक होता है?
नहीं, हर सीने का दर्द हार्ट अटैक नहीं होता। गैस, मांसपेशियों में खिंचाव, एसिडिटी या घबराहट भी सीने में दर्द का कारण बन सकती है। लेकिन क्योंकि शुरुआती हार्ट अटैक और गैस का दर्द एक-जैसा महसूस हो सकता है, इसलिए संदेह होने पर डॉक्टर से जांच कराना ही सुरक्षित इलाज है।
सीने में दर्द का इलाज घर पर कब तक सुरक्षित है?
घर पर इलाज तभी सुरक्षित माना जाता है जब डॉक्टर ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया हो कि दर्द गैस या मांसपेशियों से जुड़ा है। यदि दर्द बार-बार होने लगे, तेज हो जाए या नया महसूस हो, तो घर का इलाज बंद करके तुरंत मेडिकल जांच करानी चाहिए।









