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Fits ka Ilaj: Daure Kyun Aate Hain Aur Unka Sahi Treatment

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अचानक शरीर का झटके खाना, आंखों का पलट जाना, कुछ देर के लिए बेहोश हो जाना या आसपास की चीजों का पता न रहना, आम भाषा में इसे फिट्स कहा जाता है। भारत में आज भी फिट्स को लेकर डर, शर्म और गलत धारणाएं बहुत आम हैं। कई परिवार इसे छुपाते हैं, इलाज में देरी करते हैं या झाड़-फूंक और घरेलू उपायों पर भरोसा कर लेते हैं। इसी कारण “fits ka ilaj” आज भी गूगल पर सबसे ज्यादा खोजे जाने वाले हेल्थ टॉपिक्स में शामिल है।

सच्चाई यह है कि फिट्स कोई अभिशाप नहीं बल्कि एक मेडिकल कंडीशन है और सही इलाज से इसे पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। इस ब्लॉग में हम फिट्स का इलाज, कारण, जांच, दवाएं, सावधानियां और जीवनशैली से जुड़ी हर जरूरी जानकारी आसान और भरोसेमंद भाषा में साझा कर रहे हैं ताकि यह कंटेंट न केवल गूगल के लिए बल्कि इंसानों के लिए भी उपयोगी हो।

Table of Contents

फिट्स क्या होता है और क्यों आता है

फिट्स को मेडिकल भाषा में दौरा या सीज़र कहा जाता है। हमारा दिमाग बिजली की तरह काम करता है। जब दिमाग की कोशिकाएं अचानक गलत और तेज़ इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजने लगती हैं, तब फिट्स आता है। इस दौरान शरीर पर व्यक्ति का नियंत्रण कुछ समय के लिए खत्म हो जाता है।

फिट्स एक बार भी आ सकता है और बार-बार भी। जब बिना किसी अस्थायी वजह के बार-बार दौरे आने लगते हैं, तब इस स्थिति को मिर्गी कहा जाता है। फिट्स का इलाज इसी बात पर निर्भर करता है कि दौरा क्यों आया और किस प्रकार का है।

Kya Aap Ya Kisi Apne Ko Fits (Daure) Aate Hain?

Achanak behoshi, jhatke aana, sharir ka akadne lagna, ya baar-baar daure padna epilepsy (fits) ke lakshan ho sakte hain. Samay par sahi diagnosis aur treatment na mile to ye problem gambhir ho sakti hai. Raj Hospital Ranchi me fits ka ilaj advanced tests, sahi medicines aur experienced neurologists ke dwara kiya jata hai.

Fits Specialist Se Turant Salah Le

फिट्स और मिर्गी में सही फर्क समझना जरूरी

यह एक बहुत आम भ्रम है कि एक बार फिट्स आने का मतलब मिर्गी हो जाना। जबकि ऐसा नहीं है। तेज बुखार, ब्लड शुगर गिरने, सिर में चोट, पानी या नमक की कमी जैसे कारणों से एक बार फिट्स आ सकता है। इसे अस्थायी दौरा माना जाता है।

मिर्गी तब मानी जाती है जब बार-बार बिना किसी अस्थायी कारण के फिट्स आए। इसलिए फिट्स का इलाज शुरू करने से पहले सही जांच और सही पहचान बेहद जरूरी होती है।

फिट्स आने के मुख्य कारण

फिट्स के कारण व्यक्ति विशेष के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। सिर पर गंभीर चोट, सड़क दुर्घटना, दिमाग में संक्रमण, जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी, स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर, जेनेटिक कारण, लंबे समय तक शराब या नशे का सेवन, अचानक शराब छोड़ना, नींद की कमी और अत्यधिक तनाव फिट्स को ट्रिगर कर सकते हैं।

कई मामलों में सभी जांच सामान्य आती हैं फिर भी फिट्स होता रहता है। इसे अज्ञात कारण वाली मिर्गी कहा जाता है और इसका इलाज भी संभव है।

फिट्स के प्रकार जिन्हें जानना जरूरी है

हर फिट्स एक जैसा नहीं होता। कुछ फिट्स में व्यक्ति कुछ सेकंड के लिए शून्य में देखने लगता है। कुछ में केवल हाथ या पैर में झटके आते हैं। कुछ मरीजों को फिट्स से पहले डर, घबराहट, अजीब गंध या चक्कर जैसा महसूस होता है।

सबसे आम फिट्स वह होता है जिसमें मरीज गिर जाता है, बेहोश हो जाता है और पूरे शरीर में झटके आते हैं। फिट्स का सही प्रकार जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि fits ka ilaj उसी के अनुसार तय किया जाता है।

फिट्स का इलाज समय पर क्यों जरूरी है

फिट्स को नजरअंदाज करना या इलाज में देरी करना खतरनाक हो सकता है। बार-बार आने वाले दौरे दिमाग को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे याददाश्त कमजोर हो सकती है, सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।

सही समय पर फिट्स का इलाज शुरू करने से लगभग 70 से 80 प्रतिशत मरीज पूरी तरह कंट्रोल में आ जाते हैं और सामान्य जीवन जी सकते हैं। जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, उतना बेहतर रिजल्ट मिलेगा।

फिट्स की जांच कैसे की जाती है

फिट्स के इलाज की नींव सही जांच होती है। डॉक्टर सबसे पहले मरीज और परिवार से पूरी जानकारी लेते हैं कि दौरा कैसे आया, कितनी देर चला और उसके बाद मरीज की स्थिति कैसी रही।

इसके बाद ईईजी जांच से दिमाग की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को समझा जाता है। एमआरआई या सीटी स्कैन से दिमाग की संरचना देखी जाती है ताकि किसी चोट, सूजन या ट्यूमर का पता चल सके। जरूरत पड़ने पर खून की जांच भी की जाती है।

दवाओं से फिट्स का इलाज

दवाएं फिट्स का इलाज का सबसे प्रभावी तरीका हैं। एंटी-एपिलेप्टिक दवाएं दिमाग की गलत इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को कंट्रोल करती हैं। डॉक्टर फिट्स के प्रकार, मरीज की उम्र, वजन और अन्य बीमारियों के आधार पर दवा चुनते हैं।

दवा का असर दिखने में कुछ हफ्ते लग सकते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि दवा नियमित और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ली जाए। बिना पूछे दवा बंद करना या मात्रा बदलना फिट्स को और गंभीर बना सकता है।

दवा से कंट्रोल न होने वाले फिट्स

कुछ मरीजों में दवाओं के बावजूद फिट्स पूरी तरह कंट्रोल नहीं होते। इसे दवा प्रतिरोधी मिर्गी कहा जाता है। ऐसे मामलों में भी घबराने की जरूरत नहीं होती।

कुछ मरीजों को विशेष डाइट से लाभ मिलता है। कुछ में सर्जरी एक बेहतर विकल्प बनती है, खासकर जब फिट्स दिमाग के एक खास हिस्से से शुरू होता हो। आधुनिक इलाज में अन्य उन्नत तकनीकें भी उपलब्ध हैं।

फिट्स आने पर क्या करें और क्या न करें

अगर किसी को फिट्स आ रहा हो तो घबराएं नहीं। मरीज को सुरक्षित जगह पर लिटाएं और उसका सिर एक तरफ मोड़ दें। आसपास की कठोर चीजें हटा दें। मुंह में कुछ भी डालने की कोशिश न करें और झटके रोकने की कोशिश न करें।

अगर फिट्स पांच मिनट से ज्यादा चले या बार-बार आए तो तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। यह जानकारी हर परिवार को होनी चाहिए।

फिट्स के साथ सामान्य जीवन कैसे जिएं

फिट्स का मतलब यह नहीं कि जिंदगी रुक जाती है। सही इलाज, नियमित दवा, पूरी नींद और तनाव नियंत्रण से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। शराब और नशे से दूरी रखना बहुत जरूरी है।

ड्राइविंग, तैराकी और ऊंचाई पर काम डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। परिवार का सहयोग और मरीज का आत्मविश्वास इलाज का अहम हिस्सा है।

फिट्स से बचाव के उपाय

हर फिट्स को रोका नहीं जा सकता लेकिन जोखिम को कम किया जा सकता है। सिर की चोट से बचाव, हेलमेट का इस्तेमाल, बुखार और संक्रमण का समय पर इलाज, दवाओं का नियमित सेवन और स्वस्थ जीवनशैली फिट्स कंट्रोल में मदद करती है।

बच्चों और बुजुर्गों में फिट्स

बच्चों में तेज बुखार के दौरान फिट्स आ सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बुजुर्गों में फिट्स अक्सर स्ट्रोक या अन्य दिमागी समस्याओं से जुड़ा होता है। दोनों ही मामलों में तुरंत जांच और इलाज जरूरी है।

राज हॉस्पिटल में फिट्स का इलाज

राज हॉस्पिटल में फिट्स का इलाज आधुनिक जांच सुविधाओं और अनुभवी डॉक्टरों की निगरानी में किया जाता है। यहां मरीज को उसकी स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत इलाज योजना दी जाती है और लंबे समय तक फॉलोअप किया जाता है ताकि दौरे दोबारा न आएं।

Kya Aap Ya Kisi Apne Ko Fits (Daure) Aate Hain?

Achanak behoshi, jhatke aana, sharir ka akadne lagna, ya baar-baar daure padna epilepsy (fits) ke lakshan ho sakte hain. Samay par sahi diagnosis aur treatment na mile to ye problem gambhir ho sakti hai. Raj Hospital Ranchi me fits ka ilaj advanced tests, sahi medicines aur experienced neurologists ke dwara kiya jata hai.

Fits Specialist Se Turant Salah Le

निष्कर्ष

फिट्स का इलाज पूरी तरह संभव है। सही जानकारी, समय पर जांच और नियमित इलाज से फिट्स को कंट्रोल किया जा सकता है। यदि आप या आपके परिवार में किसी को फिट्स की समस्या है तो देरी न करें। सही समय पर उठाया गया कदम जीवन को सुरक्षित और बेहतर बना सकता है।

Frequently Asked Questions

फिट्स का इलाज क्या पूरी तरह संभव है

हाँ, फिट्स का इलाज पूरी तरह संभव है। सही समय पर जांच, नियमित दवा और डॉक्टर की सलाह का पालन करने से लगभग 70 से 80 प्रतिशत मरीजों में फिट्स पूरी तरह कंट्रोल हो जाते हैं और वे सामान्य जीवन जी सकते हैं।

फिट्स का इलाज कितने समय तक चलता है

फिट्स का इलाज मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ लोगों को दवा कुछ सालों तक लेनी पड़ती है, जबकि कुछ मामलों में लंबे समय तक इलाज की जरूरत होती है। डॉक्टर तय करते हैं कि दवा कब और कैसे बंद की जा सकती है।

क्या फिट्स का इलाज सिर्फ दवाओं से होता है

ज्यादातर मामलों में फिट्स का इलाज दवाओं से ही सफलतापूर्वक हो जाता है। लेकिन अगर दवाओं से कंट्रोल न हो, तो विशेष डाइट, सर्जरी या अन्य उन्नत इलाज विकल्प भी मौजूद होते हैं।

फिट्स आने पर तुरंत क्या करना चाहिए

फिट्स आने पर मरीज को सुरक्षित जगह पर लिटाएं, सिर एक तरफ मोड़ दें और आसपास की कठोर चीजें हटा दें। मुंह में कुछ भी न डालें और झटके रोकने की कोशिश न करें। अगर फिट्स पांच मिनट से ज्यादा चले तो तुरंत अस्पताल ले जाएं।

क्या फिट्स का इलाज बिना डॉक्टर के संभव है

नहीं, फिट्स का इलाज बिना डॉक्टर की सलाह के करना खतरनाक हो सकता है। गलत दवा, देरी या इलाज बंद करने से फिट्स और गंभीर हो सकते हैं। हमेशा न्यूरोलॉजिस्ट या विशेषज्ञ डॉक्टर से ही इलाज कराना चाहिए।

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